
क्या मैं अपनी ५ महीने की बच्ची को वाटर पानी दे सकती हु?
बिलकुल नहीं! जब तक की बच्चा ६ महीने का ना हो जाये, उसे पानी या कोई भी और तरल ना दें। नवजात शिशु के लिए माँ का दूध पर्याप्त है। दूसरी बात यह है की पानी में अनेक तरह के संक्रमण होते है जिनसे आप के शारीर को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है क्यूंकि आप के शारीर की रोग प्रतिरोधक छमता बहुत मजबूत होती है और हर प्रकार के संक्रमण से लड़ने में सक्षम होती है। मगर नवजात शिशु में रोगप्रतिरोधक छमता बहुत कम होती है जिस वजह से उन्हें पिने वाले पानी से भी संक्रमण लग सकता है।
माँ बनना अपने में एक बेहद सुखद अनुभव है। यह ईश्वर का ऐसा आशीर्वाद है जो सबको नसीब नहीं होता। मगर माँ बनने का दूसरा पहलु भी है। माँ बनते ही मनो जिम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ता है।
एक नवजात बच्चे की देखभाल दुनिया के सबसे कठिन कामों में से एक है। बच्चे के जन्म से लेकर पहले 6 month बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान बच्चे को ज्यादा देख रेख की जरुरत होती है।
कई बार कुछ महिलाएं जो पहली बार माँ बनती हैं नहीं जानती की बच्चे को 6 month से पहले पानी नहीं पिलाना चाहिए। इस लेख में आप जानेंगी की किस उम्र में बच्चों को पानी पिलाना उचित रहता है और क्योँ।
माँ के दूध में 80 प्रतिशत पानी होता है जो बच्चे में पानी की हर आवशकता को पूरा कर सकता है।
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इस article में आप पढेंगे:
- ~~~#1^^^कब दें शिशु को पानी ?@@@
- ~~~#2^^^बच्चे को पिलाने का पानी त्यार करने की विधि@@@
- ~~~#3^^^6 महीने से पहले शिशु को पानी क्यों नहीं दें?@@@
- ~~~#4^^^नवजात को पानी की जरूरत क्यों नहीं होती है?@@@
- ~~~#5^^^नवजात को पानी पिलाने से होने वाले नुकसान क्या हैं?@@@
- ~~~#6^^^गर्मी में शिशु के शरीर में पानी की कमी को कैसे पूरा करें?@@@
- ~~~#7^^^शुरुआत में ज्यादा पानी न पिलाएं@@@
anchorlink[1]anchorclose कब दें शिशु को पानी ?
ठोस आहार की तरह बच्चे को पानी भी 6 month के बाद ही देना चहिये। इससे पहले आपके बच्चे को पानी की जरूरत नहीं पड़ती है। या यूँ कहलें की बच्चे की पानी की जरुरत माँ के दूध के द्वारा पूरी हो जाती है। 6 month से पहले पानी देना बच्चे के स्वस्थ के साथ खेलवाड़ करने जैसा है। मगर जैसे जैसे बच्चे बड़ा होने लगता है, माँ का दूध बनना कम हो जाता है। बच्चा जब 6 महीने का होता है तो ठोस आहार की शुरआत करनी चाहिए। जब ठोस आहार की शुरआत होती है तो बच्चे को पानी देना भी शुरू करना चाहिए। पानी मदद करता है ठोस खाने को पचाने में। जब आप बच्चे को ठोस खाना देते है तो पानी भी दीजिये ताकि बच्चा खाने को पचा सके। आप अपने बच्चे को दिन में 4 से 5 बार दो से तीन चम्मच पानी दे सकते हैं।
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anchorlink[2]anchorclose बच्चे को पिलाने का पानी त्यार करने की विधि
बच्चे को सीधे नल का पानी न पिलायें। बच्चे में संक्रमण से लड़ने की छमता नहीं होती। ऐसी में नल का पानी बच्चे को बीमार कर सकता है। बच्चे को पिलाने वाला पानी तैयार करने के लिए डेकची में पानी ले लीजिये और उसे 2 मिनट तक उबाल लीजिये। पानी को ठंडा होने के लिए छोड़ दीजिये। जब पानी ठंडा हो जाये तो उसे ढक कर रख दीजिये। इसी पानी का इस्तेमाल करें अपने बच्चे को पिलाने के लिए। अपने बच्चे को 24 घंटे से ज्यादा पुराना पानी न पिलायें। हर दिन नया पानी त्यार करें।
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anchorlink[3]anchorclose 6 महीने से पहले शिशु को पानी क्यों नहीं दें ?
बहुत से माँ बाप 6 महीना फूटते ही अपने बच्चे को पानी देना शुरू कर देते हैं। ये गलत है। ऐसा तभी करें जब डॉक्टर ऐसा करने की सलाह दे। अक्सर जब शिशु को अतिरिक्त दूध की पूर्ति नहीं हो पाती है तब ऐसी नौबत आती है। 6 महीना से पहले बच्चे को पानी पिलाने से बच्चे में कुपोषण होने की सम्भावना बाद जाती है। माँ के दूध से ही बच्चे में पानी की पूर्ति हो जाती है। हाँ यह बात सही है की बच्चे को आपको दिन में कई बार दूध पिलाना पड़ेगा। मगर क्या आप भी दिन में कई बार भोजन नहीं करती। बच्चे का पेट छोटा होता है। इसी लिए उसे हर थोड़ी देर पे दिन में कई बार दूध पिलाने की आवशकता है।
बहुत गर्मी पड़ने पे क्या बच्चे को पानी दिया जा सकता है
बिलकुल नहीं - 6 महीना से पहले पानी पिलाने से कुपोषण की सम्भावना बढ़ जाती है। बहुत गर्मी पड़ने पे बच्चे की प्यास भुजाने के लिए उसे हर थोड़ी देर पे दूध पीला सकती है। माँ के दूध से बच्चे की पियास बुझ जाती है और पानी की जरुरत पूरी होती है।
anchorlink[4]anchorclose नवजात को पानी की जरूरत क्यों नहीं होती है ?
माँ का दूध सामान्यतः शिशु के लिए पर्याप्त होता है। बच्चे के जन्म के बढ़ माँ के स्तन से कोलोस्ट्रम (गाढ़ा दूध) निकलता है। ये दूध न केवल बच्चे को हाइड्रेट रखता है बल्कि बच्चे को हर तरह के बीमारी से भी बचता है। माँ के लिए गौर करने वाली बात यह है की जो माँ जितना ज्यादा दूध अपने बच्चे को पिलाती है उसके स्तन में उतना ज्यादा दूध बनने लगता है। इसका मतलब आप बार बार थोड़े अंतराल पे अपने बच्चे को दूध पीला कर उसके शरीर में पानी की कमी को पूरा कर सकते हैं।
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anchorlink[5]anchorclose नवजात को पानी पिलाने से होने वाले नुकसान क्या हैं ?
जिन बच्चों को 6 महीने से पहले दूध पिलाया जाता है उनमें ओरल वाटर इंटोक्सिकेशन की समस्या पायी जाती है। यह इन्फेक्शन बच्चे के दिमाग पे बुरा असर डालता है। 6 महीने से पहले पानी पिलाना बच्चे के पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंचता है। ऐसा करने पे बच्चे कुपोषण के शिकार भी हो सकते हैं।
anchorlink[6]anchorclose गर्मी में शिशु के शरीर में पानी की कमी को कैसे पूरा करें ?
शिशु का शरीर बड़ों के शरीर की तरह नहीं होता। शिशु का शरीर विकसित हो रहा होता है। गर्मी के मौसम में पानी की जरूरत शिशु को भी उतनी ही होती है जितनी की बड़ों को। बड़े तो पानी पी कर अपनी पानी की जरुरत को पूरी कर लेते हैं। मगर 6 महीने से छोटे शिशु पानी नहीं पी सकते क्योँकि से उनके स्वस्थ के लिए नुकसानदेह है। ऐसी में उनके पानी की कमी को दूध के द्वारा ही पूरा किया जा सकता है। गर्मी के मौसम में थोड़े थोड़े समयांतराल पे शिशु को स्तनपान कराती रहें।
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anchorlink[7]anchorclose शुरुआत में ज्यादा पानी न पिलाएं
6 माह पूर्ण होने पे आप को अपने बच्चे को पानी पिलाना शुरू करना चाहिए। शुरुआत में ज्यादा पानी न पिलाएं। शिशु के पेट का आकार बहुत छोटा होता है जरा सा दूध उसके लिए काफी होता है। बहुत ज्यादा पानी पिलाने पे बच्चे को दूध व बेबी फीड का पोषण ठीक तरह नहीं मिलेगा।
शुरुआत के 6 महीने आपको अपने बच्चे को अपना दूध ही पिलाना एकमात्र विकल्प है और ये एक बेहतर विकल भी है।